गरियाबंद। जिले में राजस्व विभाग और प्रशासन एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्राम पंचायत डोंगरीगांव के आश्रित ग्राम केशोडार के दर्रापारा में शासकीय भूमि पर खुलेआम हो रहे अवैध निर्माण ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। शिकायतों की ढेर, लेकिन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ कागज़ी खानापूर्ति… न कब्ज़ा हटाया गया, न निर्माण रुका, न किसी पर ठोस कार्यवाही हुई !
दर्रापारा में सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शासकीय भूमि पर कब्ज़ा कर कुछ लोगों ने मकान निर्माण शुरू कर दिया है। अवैध काम इतने खुलेआम हो रहे हैं कि देखने वालों को भी हैरानी हो रही है। लेकिन राजस्व विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों की आंखें मानो बंद पड़ी हैं।
सूचना के बाद भी ‘सिर्फ प्रकरण’, कार्यवाही गायब!
प्रशासन तक जब मामला पहुंचा तो राजस्व विभाग की टीम मौके पर अवश्य पहुंची और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज भी किया, पर इसके बाद कार्यवाही फाइलों में कैद होकर रह गई।
न कब्ज़ाधारी हटे, न निर्माण थमा… मानो पूरा मामला जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया हो।
पैसे और दलालों का खेल!
सूत्रों की मानें तो कुछ व्यक्तियों ने दलालों और पैसों की मदद से शासकीय जमीन पर कब्जा जमाने की पूरी पटकथा रची। प्रशासनिक अनदेखी ने उनके हौसले इतने बढ़ा दिए कि अवैध निर्माण तेजी से आगे बढ़ चुका है।
पंचायत की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल
पंचायत प्रतिनिधि भी खामोश बैठे हैं। कोई रोक-टोक नहीं, कोई विरोध नहीं। उनकी चुप्पी ने अवैध कब्ज़ाधारियों की हिम्मत और बढ़ा दी है।
क्या चलेगा बुलडोज़र? या फाइलों में दफ्न हो जाएगा मामला?
स्थानीय लोगों की मांग है कि इस अवैध कब्ज़े पर तुरंत बुलडोज़र चलाया जाए और उन सभी को सख्त दंड मिले जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करवाने में भूमिका निभाई है। अब जिला प्रशासन की अगली चाल पर सबकी नज़रें टिकी हैं।
क्या प्रशासन कार्यवाही कर मिसाल पेश करेगा?
या एक बार फिर फाइलों की धूल में दब जाएगा न्याय…?
इस संबंध में तहसीलदार चितेश देवांगन ने कहा कि पूर्व तहसीलदार द्वारा इस प्रकरण में विधिसम्मत कार्यवाही करते हुए नोटिस जारी किया गया था। मामला मेरे संज्ञान में आने के बाद मैंने भी संबंधित अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया है। आगे भी निर्धारित नियमों के अनुसार कार्यवाही जारी रहेगी और शासकीय भूमि पर हुए अवैध कब्ज़े को हटाया जाएगा।


