गरियाबंद। जिले में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान हनुमान जन्मोत्सव ग्राम कस में बड़े ही धूमधाम, उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। पूरे गांव में भक्तिमय रस में डुबे हुए देखने को मिला, जहां सुबह से भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी। आयोजन स्थल को आकर्षक सजावट से सजाया गया था, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया।
गरियाबंद: हनुमान जन्मोत्सव भक्ति में डुबा ग्राम कस
इस भव्य आयोजन के तहत विविध धार्मिक और सांस्कृतिक रामचरित मानस गान कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र की प्रसिद्ध मानस मंडलियों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। मंचीय कार्यक्रम में दिशा बालिका मानस परिवार मंडली कसेरू, संतों के संग मानस परिवार पत्थरमोहंदा (गरियाबंद) तथा तुलसी के बिरवा मानस परिवार नागाबुडा द्वारा रामचरितमानस के भावपूर्ण प्रसंगों की प्रस्तुति दी गई। इन प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। भजन-कीर्तन और मानस गान के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। देर रात तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और आयोजन को सफल बनाया।
इस सफल आयोजन में समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का विशेष योगदान रहा। आयोजन समिति के अध्यक्ष रमाकांत निषाद के नेतृत्व में पूरी टीम ने आयोजन को व्यवस्थित और भव्य रूप देने में अहम भूमिका निभाई।
आयोजन समिति के पदाधिकारी अध्यक्ष रमाकांत निषाद, उपाध्यक्ष त्रिलोक निषाद, सचिव लेखराज निषाद सह सचिव ललित यादव, कोषाध्यक्ष नंदू गोस्वामी, संचालक रवि कुमार ,सह संचालक डंगेश्वर निषाद, संरक्षक विनोद दीवान, टीकवेंद्र निषाद, रौनक यादव, गिरधर यादव, ताम्रध्वज निषाद, खेमलाल ध्रुव, हरीश निषाद, योगेन्द्र निषाद, सिवा निषाद, थान सिंह निषाद, मिथलेश निषाद, नवीन निषाद, परमेश्वर बंजारे, गौरव गोस्वामी, डिगेश दीवान, ओम कुमार एवं झागेश्वर यादव पदाधिकारी एवं सदस्यगण में शामिल रहे।

ग्रामीणों ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन गांव की संस्कृति और एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं। आयोजन के अंत में प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लिया।इस तरह ग्राम कस में मनाया गया यह भव्य हनुमान जयंती महोत्सव भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर यादगार बन गया।



