श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी 11 जुलाई से सावन की शुरुआत हो गई है। सावन को भगवान शिव का प्रिय माह कहा गया है। इसी माह में भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं। माना जाता है कि इस माह में जिसने व्रत, पूजन और रुद्राभिषेक कर लिया तो भगवान शिव उसके सभी दुख दूर कर देते हैं। सावन में सोमवार व्रत और रुद्राभिषेक का खासा महत्व है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि रुद्राभिषेक कब करना चाहिए और कब नहीं…
सावन के सोमवार व्रत करने से जातक के सभी मनोकामना पूर्ण हो जाते हैं। वहीं, रुद्राभिषेक करने या करवाने से जातक को अकाल मृत्यु छू तक नहीं पाती। रुद्राभिषेक करना बेहद शुभ फलदायी माना गया है। रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति के सभी रोग, भय-दोष और बाधा दूर हो जाते हैं। साथ ही इससे संतान प्राप्ति, करियर में सफलता, शीघ्र विवाह, धन वृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति जैसी सभी सुख भी हासिल हो जाते हैं। लेकिन इसका एक मुहूर्त होता है कि कब करना है रुद्राभिषेक अगर ये गलत मुहूर्त में हो जाए तो यह अनर्थ कर सकता है।
रुद्राभिषेक कब करना चाहिए
रुद्राभिषेक सावन में शिव योग वाले तिथि पर, यह सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त, प्रदोष काल या अमृत काल में किया जा सकता है। बता दें कि ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 4.00 बजे से लेकर 5.30 बजे तक, प्रदोष काल सूर्योदय के बाद का समय और अमृत काल सुबह 7.30 से 9.00 बजे तक होता है।
कब नहीं करना चाहिए रुद्राभिषेक
रुद्राभिषेक कभी भी राहुकाल के समय नहीं करना चाहिए और न ही दोपहर के समय यह पूजा होनी चाहिए।
रुद्राभिषेक करने के लिए शुभ तिथि
- 14 जुलाई 2025 चतुर्थी तिथि
- 15 जुलाई 2025 पंचमी तिथि
- 18 जुलाई 2025 अष्टमी तिथि
- 21 जुलाई 2025 एकादशी तिथि
- 22 जुलाई 2025 द्वादशी तिथि
- 23 जुलाई 2025 चतुर्दशी तिथि
- 24 जुलाई 2025 अमावस्या तिथि
- 26 जुलाई 2025 द्वितीया तिथि
- 29 जुलाई 2025 पंचमी तिथि
- 30 जुलाई 2025 षष्ठी तिथि
- 6 अगस्त 2025 द्वादशी तिथि
- 7 अगस्त 2025 त्रयोदशी तिथि