गरियाबंद। नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक दशक से सक्रिय चार हार्डकोर माओवादी संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौट आए। आत्मसमर्पित माओवादियों में डीव्हीसी रैंक का एक माओवादी और पोलित ब्यूरो सदस्य/सीसीएम मोदेम बालाकृष्णन उर्फ मनोज के प्रोटेक्शन टीम के तीन सदस्य शामिल हैं। आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस को 19 लाख 10 हजार रुपए नगद, भारी मात्रा में गोला-बारूद और आधुनिक हथियार भी बरामद हुए।
आत्मसमर्पण की प्रक्रिया गरियाबंद जिला पुलिस, 65 बटालियन सीआरपीएफ, 211 बटालियन सीआरपीएफ तथा 207 कोबरा की मौजूदगी में संपन्न हुई।
आत्मसमर्पित माओवादी
- दीपक उर्फ भीमा मंडावी – डीव्हीसीएम, 8 लाख का ईनामी।
- कैलाश उर्फ भीमा भोगाम – एरिया कमेटी सदस्य, 5 लाख का ईनामी।
- रनिता उर्फ पायकी – एरिया कमेटी सदस्य, 5 लाख की ईनामी।
- सुजीता उर्फ उर्रे कारम – 1 लाख की ईनामी।
- माओवादी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका
डीव्हीसीएम दीपक मंडावी वर्ष 2008 में बाल्यावस्था से ही संगठन से जुड़ गया था। उसने गरियाबंद और धमतरी जिले में करीब 25 से अधिक माओवादी घटनाओं में भूमिका निभाई, जिनमें ओलाराव, कट्टीगांव, काण्डसर और बेसराद्वार मुठभेड़ जैसी बड़ी घटनाएं शामिल हैं।
कैलाश उर्फ भीमा भोगाम मनोज के सुरक्षा दस्ते का अहम सदस्य रहा और कंधमाल, नुआपाड़ा (ओडिशा), बस्तर और गरियाबंद क्षेत्र में कई हमलों में शामिल रहा।
रनिता उर्फ पायकी ने भी मनोज के सुरक्षा दस्ते में रहते हुए कई हमलों में हिस्सा लिया और हाल ही में एसीएम पद पर पदोन्नत हुई थी।
वहीं, सुजीता उर्फ उर्रे कारम को जुलाई 2023 में संगठन में भर्ती कराया गया था और कम समय में ही प्रोटेक्शन टीम तक पहुंच गई।
आत्मसमर्पण के कारण
आत्मसमर्पित माओवादियों ने बताया कि संगठन अब विचारधारा से भटक चुका है। वे निर्दोष ग्रामीणों की हत्या, अवैध वसूली, विकास कार्यों में बाधा और छोटे कैडरों के शोषण जैसे कामों में ही लग गए हैं। साथ ही, पुलिस मुखबिरी के शक में ग्रामीणों की हत्या करना, राशन व आवश्यक सामानों की लूट, ठेकेदारों से पैसा वसूलना और युवाओं को जबरन संगठन में भर्ती करना संगठन की वास्तविकता बन गई है।
माओवादी कैडरों ने बताया कि शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, आवास और रोजगार जैसी योजनाओं ने उन्हें प्रभावित किया। हाल के वर्षों में कई साथियों द्वारा आत्मसमर्पण कर खुशहाल जीवन जीने की जानकारी भी उन्हें संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
बरामद हथियार और नगदी
आत्मसमर्पण के बाद नक्सलियों के बताए ठिकाने पर पुलिस ने दबिश दी। गोबरा जंगल में छिपाए गए हथियार व नगदी बरामद किए गए। इनमें –
- 4 देशी बीजीएल,
- 4 देशी सुरका सेल,
- 1 हैंड ग्रेनेड,
- 2 नक्सली पोशाकें,
- 1 बेल्ट,
- 2 मोबाइल फोन,
- रेडियो,
- 15 नग जिलेटिन रॉड,
- 50 इलेक्ट्रानिक डेटोनेटर,
- 1 टिफिन बम,
- INSAS व SLR मैगजीन,
- 31 से अधिक जिंदा कारतूस,
1 लैपटॉप, चार्जर और अन्य इलेक्ट्रानिक डिवाइस शामिल हैं।
सबसे बड़ी बरामदगी नगदी की रही। मौके से कुल 16 लाख 50 हजार रुपए नकद बरामद किए गए, जिसमें ₹500 और ₹2000 के नोट शामिल थे।
अभियान की सफलता
पुलिस और केंद्रीय बलों की इस संयुक्त कार्रवाई को गरियाबंद पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अधिकारियों ने इसे नक्सल उन्मूलन अभियान की बड़ी सफलता बताया।
आत्मसमर्पित माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत प्रोत्साहन राशि और सुरक्षा प्रदान की जाएगी।