CG bajar: गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर ब्लॉक के बेलटुकरी गांव में ग्रामीण हाट का निर्माण पूरा हुआ। अब ग्रामीणों को बारिश और धूप से राहत मिलेगी। मनरेगा और जिला पंचायत निधि से बने इस ग्रामीण हाट से बाजार चौक में कारोबार, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी बढ़ी हैं।
फिगेंश्वर ब्लॉक के बेलटुकरी गांव अब विकास की नई तस्वीर
फिंगेश्वर विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाला बेलटुकरी गांव अब विकास की नई तस्वीर पेश कर रहा है। गांव की कुल आबादी लगभग 3,507 है और यहां के 707 परिवारों के पास महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के जॉब कार्ड हैं। लंबे समय से ग्रामीणों की मांग थी कि यहां एक स्थायी ग्रामीण हाट (बाजार चौक) का निर्माण हो, ताकि लोगों को बरसात और तेज धूप से राहत मिल सके। आखिरकार पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित होने के बाद जिला पंचायत द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्य को स्वीकृति दी गई।
स्वीकृति और बजट व्यवस्था
ग्रामीण हाट निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति 5 लाख रुपये की लागत से प्रदान की गई। इसमें से 3 लाख 10 हजार रुपये मनरेगा योजना के तहत और 1 लाख 90 हजार रुपये जिला पंचायत विकास निधि से उपलब्ध कराए गए। बजट स्वीकृति के बाद जनपद पंचायत फिंगेश्वर ने कार्यादेश जारी किया और हाट निर्माण का कार्य ले-आउट के आधार पर शुरू हुआ। सबसे पहले श्रमिकों की नियुक्ति हुई और कॉलम गड्ढों की खुदाई का कार्य प्रारंभ किया गया।
पहले की स्थिति: खुले में लगता था बाजार
बेलटुकरी का साप्ताहिक बाजार पहले खुले स्थान पर लगता था। गांव और आसपास के ग्रामीण किसान एवं व्यापारी यहां सब्जियां, अनाज, दालें, मवेशियों के लिए चारा और घरेलू सामान बेचने आते थे। बरसात के दिनों में बाजार में कीचड़ और बारिश से लोगों को भारी असुविधा होती थी। वहीं गर्मी के मौसम में तेज धूप के कारण ग्रामीणों और व्यापारियों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
ग्रामीण हाट निर्माण से मिली राहत
अब ग्रामीण हाट निर्माण पूरा हो जाने के बाद गांव के लोग खुश हैं। बाजार चौक पर बने इस शेड ने ग्रामीणों को बारिश और धूप दोनों से राहत दिलाई है। इसके साथ ही बाहर से आने वाले सब्जी एवं अनाज विक्रेताओं की संख्या भी बढ़ गई है। पहले जहां व्यापारी खुले में दुकान लगाने से हिचकते थे, वहीं अब उन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध हो गया है।
धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी केंद्र
यह ग्रामीण हाट केवल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का भी प्रमुख स्थल बन चुका है। गांव के त्योहार, देवी-देवताओं की पूजा, सामूहिक बैठकें, सांस्कृतिक मंचन और अन्य आयोजनों के लिए ग्रामीण हाट का यह शेड उपयोग में लिया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में सामूहिकता और आपसी सहयोग की भावना भी मजबूत हो रही है।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
ग्रामीण हाट निर्माण ने न सिर्फ सुविधा दी बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा किए। मनरेगा योजना के तहत बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिकों को काम मिला। गड्ढा खुदाई से लेकर कॉलम निर्माण, ईंट-पत्थर ढुलाई, छत ढलाई और फिनिशिंग कार्य तक में स्थानीय लोगों ने श्रमदान किया। इससे उनके घरों में आर्थिक मदद पहुँची।
साथ ही, नए हाट के कारण बाहर से आने वाले व्यापारी अब नियमित रूप से बेलटुकरी पहुंच रहे हैं। इससे गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें सब्जियां, अनाज और अन्य सामान खरीदने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता।
ग्रामीणों की प्रतिक्रियाएं
बेलटुकरी के ग्रामीणों ने हाट निर्माण पर खुशी जताई है। गांव के एक किसान का कहना है – “पहले बारिश और धूप में हम बहुत परेशान होते थे। अब बाजार चौक में शेड बन जाने से हमें राहत मिली है। व्यापारी भी अब गांव में ज्यादा संख्या में आने लगे हैं।”
इसी तरह महिलाओं का कहना है कि बाजार चौक में शेड बनने से उन्हें अब बिना किसी परेशानी के सब्जी और अन्य घरेलू सामान खरीदने की सुविधा मिल रही है।
विकास की दिशा में अहम कदम
बेलटुकरी का ग्रामीण हाट गांव के विकास का प्रतीक बन चुका है। यह उदाहरण है कि कैसे पंचायत स्तर पर ग्रामीणों की आवश्यकता को समझकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर उन्हें राहत दी जा सकती है। मनरेगा और जिला पंचायत निधि का सही उपयोग ग्रामीण जीवन को आसान और व्यवस्थित बना रहा है।
गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर ब्लॉक के बेलटुकरी गांव में ग्रामीण हाट का निर्माण पूरा हुआ। अब ग्रामीणों को बारिश और धूप से राहत मिलेगी। मनरेगा और जिला पंचायत निधि से बने इस ग्रामीण हाट से बाजार चौक में कारोबार, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी बढ़ी हैं।
फिंगेश्वर विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाला बेलटुकरी गांव अब विकास की नई तस्वीर पेश कर रहा है। गांव की कुल आबादी लगभग 3,507 है और यहां के 707 परिवारों के पास महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के जॉब कार्ड हैं। लंबे समय से ग्रामीणों की मांग थी कि यहां एक स्थायी ग्रामीण हाट (बाजार चौक) का निर्माण हो, ताकि लोगों को बरसात और तेज धूप से राहत मिल सके। आखिरकार पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित होने के बाद जिला पंचायत द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्य को स्वीकृति दी गई।
ग्रामीण हाट निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति 5 लाख रुपये की लागत से प्रदान की गई। इसमें से 3 लाख 10 हजार रुपये मनरेगा योजना के तहत और 1 लाख 90 हजार रुपये जिला पंचायत विकास निधि से उपलब्ध कराए गए। बजट स्वीकृति के बाद जनपद पंचायत फिंगेश्वर ने कार्यादेश जारी किया और हाट निर्माण का कार्य ले-आउट के आधार पर शुरू हुआ। सबसे पहले श्रमिकों की नियुक्ति हुई और कॉलम गड्ढों की खुदाई का कार्य प्रारंभ किया गया
बेलटुकरी का साप्ताहिक बाजार पहले खुले स्थान पर लगता था। गांव और आसपास के ग्रामीण किसान एवं व्यापारी यहां सब्जियां, अनाज, दालें, मवेशियों के लिए चारा और घरेलू सामान बेचने आते थे। बरसात के दिनों में बाजार में कीचड़ और बारिश से लोगों को भारी असुविधा होती थी। वहीं गर्मी के मौसम में तेज धूप के कारण ग्रामीणों और व्यापारियों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
अब ग्रामीण हाट निर्माण पूरा हो जाने के बाद गांव के लोग खुश हैं। बाजार चौक पर बने इस शेड ने ग्रामीणों को बारिश और धूप दोनों से राहत दिलाई है। इसके साथ ही बाहर से आने वाले सब्जी एवं अनाज विक्रेताओं की संख्या भी बढ़ गई है। पहले जहां व्यापारी खुले में दुकान लगाने से हिचकते थे, वहीं अब उन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध हो गया है।
यह ग्रामीण हाट केवल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का भी प्रमुख स्थल बन चुका है। गांव के त्योहार, देवी-देवताओं की पूजा, सामूहिक बैठकें, सांस्कृतिक मंचन और अन्य आयोजनों के लिए ग्रामीण हाट का यह शेड उपयोग में लिया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में सामूहिकता और आपसी सहयोग की भावना भी मजबूत हो रही है।
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ग्रामीण हाट निर्माण ने न सिर्फ सुविधा दी बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा किए। मनरेगा योजना के तहत बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिकों को काम मिला। गड्ढा खुदाई से लेकर कॉलम निर्माण, ईंट-पत्थर ढुलाई, छत ढलाई और फिनिशिंग कार्य तक में स्थानीय लोगों ने श्रमदान किया। इससे उनके घरों में आर्थिक मदद पहुँची।
साथ ही, नए हाट के कारण बाहर से आने वाले व्यापारी अब नियमित रूप से बेलटुकरी पहुंच रहे हैं। इससे गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें सब्जियां, अनाज और अन्य सामान खरीदने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता
बेलटुकरी के ग्रामीणों ने हाट निर्माण पर खुशी जताई है। गांव के एक किसान का कहना है – “पहले बारिश और धूप में हम बहुत परेशान होते थे। अब बाजार चौक में शेड बन जाने से हमें राहत मिली है। व्यापारी भी अब गांव में ज्यादा संख्या में आने लगे हैं।”
इसी तरह महिलाओं का कहना है कि बाजार चौक में शेड बनने से उन्हें अब बिना किसी परेशानी के सब्जी और अन्य घरेलू सामान खरीदने की सुविधा मिल रही है।
बेलटुकरी का ग्रामीण हाट गांव के विकास का प्रतीक बन चुका है। यह उदाहरण है कि कैसे पंचायत स्तर पर ग्रामीणों की आवश्यकता को समझकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर उन्हें राहत दी जा सकती है। मनरेगा और जिला पंचायत निधि का सही उपयोग ग्रामीण जीवन को आसान और व्यवस्थित बना रहा है।
निष्कर्ष
बेलटुकरी में ग्रामीण हाट निर्माण न केवल बाजार लगाने वालों और खरीदारों के लिए राहत है, बल्कि यह गांव की सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र बन चुका है। मनरेगा जैसी योजनाएं जब स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उपयोग होती हैं तो उनका सीधा लाभ ग्रामीणों तक पहुँचता है। अब बेलटुकरी गांव के लोग गर्व से कह सकते हैं कि उनका हाट चौक विकास की नई मिसाल बन चुका है।
बेलटुकरी में ग्रामीण हाट निर्माण न केवल बाजार लगाने वालों और खरीदारों के लिए राहत है, बल्कि यह गांव की सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र बन चुका है। मनरेगा जैसी योजनाएं जब स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उपयोग होती हैं तो उनका सीधा लाभ ग्रामीणों तक पहुँचता है। अब बेलटुकरी गांव के लोग गर्व से कह सकते हैं कि उनका हाट चौक विकास की नई मिसाल बन चुका है।