CG breaking: गरियाबंद जिले के पांडुका थाना क्षेत्र में घटी दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डूबो दिया है। 7 वर्षीय मासूम अर्पित यादव के शव का नहर से मिलना न केवल उसके परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव और आसपास के इलाकों के लिए असहनीय दुख का विषय बन गया। तीजा जैसे पावन पर्व के दिन जब हर घर में हंसी-खुशी का माहौल होना चाहिए था, उसी दिन इस मासूम की लापता होने की खबर ने गांव को शोकाकुल कर दिया।
मासूम अर्पित की मौत से पसरा मातम, नहर से मिला 7 वर्षीय बच्चे का शव
तीन दिनों तक लगातार अर्पित की तलाश चलती रही। परिवारजन, ग्रामीण और पुलिस प्रशासन मिलकर उसकी खोजबीन में जुटे रहे। अंततः करीब 36 घंटे तक चले लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद नहर से मासूम का शव मिलने की पुष्टि हुई। इस घटना के बाद परिजनों की हालत बदहवास है। घर का माहौल मातम में बदल गया है, और पूरे गांव में गहरी शोक की लहर है।
घटना का पूरा सिलसिला
जानकारी के मुताबिक, अर्पित यादव अचानक लापता हो गया था। परिवारजन ने पहले उसकी आसपास तलाश की, लेकिन जब मासूम का कहीं पता नहीं चला तो पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खोज अभियान शुरू किया। ग्रामीणों और बचाव दल की मदद से लगातार प्रयास किए जाते रहे। इस बीच अर्पित के माता-पिता और परिजनों की आंखें अपने बच्चे के सुरक्षित लौट आने की आस में बार-बार दरवाजे की ओर टकटकी लगाए रहीं।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 36 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मासूम का शव नहर में मिला। शव की पुष्टि होते ही गांव में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम की मां बेसुध हो गई और पिता का भी दर्द शब्दों से परे है। पूरा गांव इस दुखद घटना से गमगीन है।
पर्व का दिन बना मातम का दिन
छत्तीसगढ़ में तीजा का पर्व महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यह दिन आमतौर पर घर-परिवार में खुशियां, गीत-संगीत और उत्सव के रूप में मनाया जाता है। लेकिन अर्पित के परिवार के लिए यह दिन कभी न भूलने वाला काला दिन बन गया। जिस दिन महिलाओं ने तीजा के गीत गाए, उसी दिन इस परिवार ने अपने लाडले को खो दिया। गांव की हर महिला और बुजुर्ग की आंखें नम हैं।
पुलिस ने की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही पांडुका थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तुरंत जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है और आगे की जांच जारी है। फिलहाल प्राथमिक रूप से इसे हादसा माना जा रहा है, लेकिन पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है।
ग्रामीणों में आक्रोश और संवेदना
गांव के लोग इस घटना से गहरे सदमे में हैं। सभी ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए सरकार और प्रशासन से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि नहर और आसपास के क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी शोक व्यक्त करते हुए परिजनों को सांत्वना दी है।
सोशल मीडिया पर शोक की लहर
अर्पित की मौत की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर भी संवेदनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लोग पोस्ट और संदेशों के जरिए मासूम की आत्मा की शांति की प्रार्थना कर रहे हैं। साथ ही परिवार को इस कठिन समय में हिम्मत देने की कामना कर रहे हैं।
निष्कर्ष
7 वर्षीय मासूम अर्पित यादव का इस तरह से दुनिया से जाना न सिर्फ उसके परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए गहरा आघात है। यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज और प्रशासन दोनों को और सजग होने की आवश्यकता है। तीजा जैसे खुशी के दिन का मातम में बदल जाना हर किसी के दिल को झकझोर रहा है।
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फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमें और गंभीर कदम उठाने होंगे।