नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले छह महीनों में ऐसा कदम उठाया है जिसकी चर्चा पूरे वित्त और बैंकिंग सेक्टर में हो रही है। आरबीआई ने अपने दशकों पुराने नियमों, आदेशों और सर्कुलरों की व्यापक समीक्षा करते हुए हजारों अनावश्यक और पुराने सर्कुलरों को खत्म कर दिया है।
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6 महीने की कार्रवाई में क्या हुआ?
आरबीआई ने इस बड़े ‘नियमन सफाई अभियान’ में कुल 9,446 सर्कुलरों की जांच की। इनकी समीक्षा के बाद पाया गया कि बड़ी संख्या में सर्कुलर अब उपयोगी नहीं रह गए थे या आधुनिक बैंकिंग सिस्टम में उनकी जरूरत नहीं थी।
9,446 सर्कुलर की समीक्षा
5,673 सर्कुलर रद्द—क्योंकि वे या तो पुराने हो चुके थे या अप्रासंगिक
बाकी बचे लगभग 3,800+ सर्कुलरों को समेकित किया गया
अंत में तैयार किए गए 244 नए मास्टर डायरेक्शन
अब बैंकिंग सिस्टम कैसे चलेगा?
आरबीआई के नए नियमों के अनुसार, अब पूरा बैंकिंग सिस्टम केवल 244 मास्टर डायरेक्शन के आधार पर चलेगा। इससे बैंकिंग सेक्टर में नियम समझना और उनका पालन करना आसान होगा।
क्यों जरूरी थी यह ‘नियमन सफाई’?
कई पुराने नियम आज की टेक्नोलॉजी-चालित बैंकिंग के अनुरूप नहीं थे।
बहुत अधिक सर्कुलर होने से बैंकों के लिए पालन करना मुश्किल हो जाता है।
नए सरल नियमों से पारदर्शिता बढ़ेगी,
कंप्लायंस आसान होगा,
और आम ग्राहकों के लिए भी बैंकिंग सेवाएँ अधिक सुव्यवस्थित होंगी।
RBI का उद्देश्य
इस अभियान का मुख्य लक्ष्य था—नियमों को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाना, ताकि भारतीय बैंकिंग सिस्टम और अधिक मजबूत और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो सके।



