CG khabar: गरियाबंद जिले का एक ऐसा गांव देवरी जहां ऋषि पंचमी के अवसर पर नागों की पूजा की जाती है। यह परंपरा न केवल गांववासियों के लिए आस्था का प्रतीक है बल्कि दूर-दराज़ के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर इस अद्भुत आयोजन के साक्षी बनते हैं।
ऋषि पंचमी पर नागों की अद्भुत पूजा – अनोखी परंपरा
गांव की जय सांवरा गुरु पाठशाला में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। परंपरा के अनुसार, गांव के विभिन्न घरों से नागों को एकत्र किया जाता है और उनका सामूहिक पूजन होता है। मान्यता है कि ऋषि पंचमी पर नागदेव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और परिवार पर सदैव सुख-शांति बनी रहती है।
पूरे गांव में एक साथ नागों की शोभायात्रा निकाली जाती है। ढोल-नगाड़ों और जस गीतों के बीच गांववाले पारंपरिक परिधान में नागदेव की झांकी लेकर शोभायात्रा में शामिल होते हैं। महिलाएं मंगल गीत गाती हैं और युवा हाथों में कलश व ध्वज थामे चलते हैं। यह दृश्य श्रद्धा और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
शोभायात्रा के दौरान गांव के लोग ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र और दूर-दराज़ से पहुंचे श्रद्धालु भी सम्मिलित होते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस अनोखी परंपरा को देखने और इसमें भाग लेने मात्र से ही पुण्य की प्राप्ति होती है।
यात्रा का समापन गांव के शीतला तालाब देवरी में होता है, जहां नागदेवों की विशेष पूजा-अर्चना कर उन्हें जल में विसर्जित किया जाता है। यहां भक्त बड़ी श्रद्धा से दूध, हल्दी, कुंकुम और पुष्प अर्पित कर नागदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा सदियों पुरानी है और पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। इसे गांव की पहचान भी माना जाता है। आयोजन में शामिल लोग कहते हैं कि नागों के साथ ऐसा सामूहिक धार्मिक आयोजन विरले ही कहीं देखने को मिलता है।
ऋषि पंचमी पर नागदेवों की पूजा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोक संस्कृति और आस्था जब मिलती है तो उसकी झलक अद्भुत और अलौकिक होती है। इस अवसर पर पूरा गांव भक्तिभाव और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर हो उठा।