ISRO EOS-N1 Mission: आसमान में भारत एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है. इसरो 2026 के लॉन्चिंग कैलेंडर की शुरुआत सोमवार को ‘पीएसएलवी-सी62′ मिशन के साथ करेगा. पीएसएलवी-सी62 मिशन की लॉन्चिंग 12 जनवरी को सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होनी है. इस मिशन के तहत इसरो एडवांस अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-एन1 को लॉन्च करेगा, जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया है. उम्मीद की जा रही है कि यह अंतरिक्ष से भारत की निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने वाला और भारत के लिए ‘आसमान में एक और आंख’ साबित होगा. इसके साथ ही अन्य देशों के पेलोड भी भेज जाएंगे.

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इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल यानी पीएलएलवी अपनी पिछली विफलता के बाद वापसी के मिशन पर है. अपने 64वें मिशन पर 260 टन वजनी और 44 मीटर ऊंचा यह रॉकेट भारत निर्मित एक स्पाई सैटेलाइट और 14 अन्य छोटे सेटेलाइट अंतरिक्ष में ले जाएगा. हैदराबाद स्थित भारतीय अंतरिक्ष कंपनी ध्रुवा स्पेस पहली बार सात सैटेलाइट को लॉन्च करने जा रही है. (ISRO EOS-N1 Mission)
पीएसएलवी की नई उड़ान की खास बातें:
- भारत का सबसे भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी पिछली विफलता के बाद वापसी मिशन पर
- पीएसएलवी के 64वें मिशन में 260 टन वजनी और 44 मीटर ऊंचा यह रॉकेट 15 सेटेलाइट लॉन्च करेगा.
- इनमें सबसे खास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ द्वारा निर्मित विशेष इमेजिंग स्पाई सेटेलाइट है.
- डीआरडीओ के अन्वेषा सैटेलाइट में दुश्मन के ठिकानों का सटीक मानचित्रण करने की खास इमेजिंग क्षमता है.
- इसके साथ ही 14 अन्य सेटेलाइट भी प्रक्षेपित किए जाएंगे, जिनमें से 8 विदेशी उपग्रह शामिल हैं.
- सात उपग्रह हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस के हैं, जो भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
- 18 मई, 2025 को पीएसएलवी का पिछला प्रक्षेपण विफल रहा था. रॉकेट के तीसरे चरण में खराबी आ गई थी.
- भारत इस बार अपने देश के साथ ही फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और ब्रिटेन के सेटेलाइट लॉन्च करेगा.

ISRO EOS-N1 Mission: इसरो की बड़ी उड़ान… 12 जनवरी को PSLV-C62 से लॉन्च होगा ‘अन्वेषा’, अंतरिक्ष से बढ़ेगी भारत की निगरानी शक्ति
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25 घंटे की उलटी गिनती शुरू
इस मिशन के लिए 25 घंटे की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है. इसरो ने बताया कि पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का निर्माण थाईलैंड और ब्रिटेन ने संयुक्त रूप से किया है. लॉन्च होने के बाद यह मिशन दो घंटे से अधिक समय तक चलेगा. मुख्य पेलोड ‘पृथ्वी अवलोकन उपग्रह’ 13 अन्य सह-यात्री उपग्रहों के साथ ‘पिगीबैक मोड’ में उड़ान भरेगा. लॉन्चिंग के बाद इन सेटेलाइट को करीब 17 मिनट बाद निर्धारित कक्षा में स्थापित किया जाएगा. इसरो के मुताबिक, पीएसएलवी अब तक 63 उड़ानें पूरी कर चुका है, जिनमें महत्वाकांक्षी ‘चंद्रयान-1′, ‘मंगल ऑर्बिटर मिशन’ (मॉम) और ‘आदित्य-एल1′ मिशन शामिल हैं. (ISRO EOS-N1 Mission)



