CG – राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में मंगलवार को ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के रायपुर में अंतर्गत राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण एवं जिला मास्टर ट्रेनर्स के चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री दुर्गादास उइके ने दीप प्रज्वलन कर प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, केंद्रीय ट्राईफेड के प्रबंध संचालक हृदेश कुमार, प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा, आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर सहित वरिष्ठ अधिकारी, मास्टर ट्रेनर और प्रशिक्षार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
रायपुर: मानवता और परहित भाव से कार्य करने का आह्वान – केंद्रीय मंत्री उईके
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि हमें केवल अपने स्वहित के लिए नहीं, बल्कि समाज के उन वर्गों के लिए भी काम करना चाहिए जो विकास की राह में पीछे छूट गए हैं। उनके लिए कार्य करना ही असली सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां उसी व्यक्ति को याद रखती हैं जिसका व्यक्तित्व और कर्तृत्व उत्कृष्ट हो तथा जिसके मन में मानवीय संवेदना का चिंतन हो।
उइके ने आगे कहा कि जीवन केवल भोग-विलास, भौतिकता, पेट और प्रजनन तक सीमित नहीं है। इसके साथ ही हमें मानवता के प्रति अपने मूल दायित्वों को भी प्राथमिकता से निभाना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों से कहा कि आदि कर्मयोगी का यह दायित्व है कि वे जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए उनके उत्पादों को उचित बाजार और मूल्य दिलाने में सहयोग करें।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि वैश्विक दृष्टिकोण रखते हुए हमें विश्व-भारती पर भी चिंतन करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि यदि हम पिछड़े वर्गों के विकास के लिए निःस्वार्थ भाव से काम करेंगे तो यह अभियान निश्चित रूप से सफल होगा।
विकसित भारत की संकल्पना से जुड़ा अभियान
कार्यक्रम में राज्य के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना पर आधारित यह आदि कर्मयोगी अभियान विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल राज्य को इस अभियान से बड़ी उम्मीदें हैं।
नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सोच है कि जनजातीय समाज की समस्याओं का निराकरण संवेदनशीलता और जनभागीदारी से किया जाए। इसी सोच से पीएम जनमन और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान की शुरुआत की गई है। इन अभियानों ने विशेष रूप से पिछड़े जनजातीय समूहों (PVTGs) के जीवन स्तर में सुधार लाने का मार्ग प्रशस्त किया है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में भी जनजातीय बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में मौजूद क्रिटिकल गैप्स की पहचान कर उन्हें दूर करने के ठोस कदम उठाए जाएंगे। इससे हर गांव को बुनियादी सुविधाओं से संतृप्त किया जाएगा।
मंत्री नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक ‘सेवा पर्व’ के रूप में आदि कर्मयोगी अभियान को जोर-शोर से चलाने का आह्वान किया है।
सेवा, समर्पण और संकल्प की भावना जरूरी – ट्राईफेड
केंद्रीय ट्राईफेड के प्रबंध संचालक हृदेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान को सफल बनाने के लिए सेवा, समर्पण और संकल्प की भावना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पीएम जनमन और धरती आबा अभियान को जनभागीदारी से सफलता मिली है, उसी तरह इस अभियान को भी मिल सकती है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि ट्राईफेड की ओर से छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज के विकास के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
जनभागीदारी से सुशासन – प्रमुख सचिव बोरा
प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा ने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान का लक्ष्य केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से सुशासन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृतकाल में वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए इस अभियान का योगदान महत्वपूर्ण होगा।
https://www.facebook.com/share/1JAvyGN7z8/
उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत प्रदेश के 28 जिलों के 138 विकासखंडों में 1 लाख 33 हजार वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे जनजागरूकता और जनभागीदारी के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
बोरा ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गीता में भी कर्मयोगी और भक्तियोगी की महत्ता प्रतिपादित की गई है। हमें संवेदनशीलता के साथ समाज के पिछड़े वर्गों के लिए कार्य करना है।
पीएम-जनमन और धरती आबा जैसे अभियान लाभकारी
प्रमुख सचिव ने कहा कि जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में धरती आबा और पीएम-जनमन जैसे संतृप्तिमूलक अभियानों की शुरुआत की गई है। इनके अंतर्गत आदिवासी बहुल गांवों और पीवीटीजी बस्तियों में आवास, पक्की सड़कें, जलापूर्ति, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
प्रशिक्षण प्रक्रिया का विस्तृत विवरण
आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अभियान रेस्पॉन्सिव गवर्नेंस प्रोग्राम के तहत चलाया जा रहा है।
- रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के जिला स्तरीय प्रशिक्षणार्थियों को पहले चरण में 11 से 14 अगस्त तक प्रशिक्षण दिया गया।
- वहीं बस्तर और सरगुजा संभाग के प्रशिक्षणार्थियों को 18 से 21 अगस्त तक मास्टर ट्रेनरों द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है।
- ये मास्टर ट्रेनर आगे ब्लॉक स्तर और ग्राम स्तर पर आदि सहयोगी और आदि साथी को प्रशिक्षित करेंगे।
- प्रशिक्षित आदि कर्मयोगी गांव-गांव जाकर जनजातीय परिवारों से चर्चा करेंगे और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करेंगे।
भागीदारी से विकसित होगा आदिवासी समाज
प्रशिक्षण कार्यशाला में शामिल बस्तर और सरगुजा संभाग के प्रशिक्षार्थियों ने भी अपने विचार रखे। उनका कहना था कि यह अभियान न केवल उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर देगा, बल्कि आदिवासी समाज के जीवन स्तर को बदलने की दिशा में भी ठोस पहल करेगा।
प्रशिक्षणार्थियों ने कहा कि वे अभियान के तहत घर-घर जाकर जनजातीय समाज को जागरूक करेंगे, सरकारी योजनाओं से जोड़ेंगे और उनके पारंपरिक उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगे।
निष्कर्ष
रायपुर में आयोजित यह राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला केवल एक कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि यह आदि कर्मयोगी अभियान की व्यापक तैयारी का हिस्सा है। इसका उद्देश्य है कि जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए उन्हें मुख्यधारा के विकास से जोड़ा जाए।
केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों, अधिकारियों और प्रशिक्षकों के संदेश साफ हैं—इस अभियान को सेवा, समर्पण और संकल्प की भावना से ही सफलता मिलेगी। आने वाले दिनों में जब लाखों प्रशिक्षित आदि कर्मयोगी गांव-गांव पहुंचेंगे, तो निश्चित ही छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के आदिवासी समाज के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देगा।