PM आवास: कोरबा जिले की छेरकीन बाई को PM आवास योजना का लाभ मिला। अब उन्हें कच्चे मकान और बारिश की परेशानियों से छुटकारा मिला है। यह पक्का मकान उनके बुढ़ापे का सहारा बन गया है।
PM आवास: यह सिर्फ पक्का मकान ही नहीं, बुढ़ापे का सहारा भी है
कोरबा जिले में PM आवास योजना (PM Awas Yojana) ने आज देशभर के लाखों गरीब और बेसहारा परिवारों को छत मुहैया कराई है। यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनके लिए पक्का घर बनाना कभी सपना ही रहा। कोरबा जिले के वनांचल ग्राम केराकछार की रहने वाली छेरकीन बाई भी उन्हीं लाभार्थियों में से एक हैं, जिन्हें इस योजना ने नया जीवन और बुढ़ापे में सहारा दिया।
झोपड़ी से पक्के मकान तक का सफर
छेरकीन बाई की कहानी किसी भी फिल्मी कहानी से कम नहीं। जंगलों के बीच बने एक छोटे से कच्चे मकान में उनका जीवन गुजर रहा था। गरीबी और परिस्थितियों ने उन्हें इस स्थिति में ला खड़ा किया था कि पक्का मकान का सपना उनके लिए सिर्फ ख्वाब बनकर रह गया था।
बच्चे न होने की वजह से बुढ़ापे का सहारा भी उनके पास नहीं था। अकेली जिंदगी, ऊपर से कच्चे मकान की समस्याएं – यह उनके जीवन का हिस्सा बन चुका था। बरसात के दिनों में जब झोपड़ी से पानी टपकता था, तो मजबूरन उन्हें भीगकर रात गुजारनी पड़ती थी। कई बार खपरैल की मरम्मत भी करनी पड़ती थी, लेकिन गरीबी के चलते हर बार इंतजाम कर पाना संभव नहीं होता था।
PM आवास योजना से टूटी उम्मीदों को मिला सहारा
समय के साथ छेरकीन बाई ने मान लिया था कि अब उनका पक्का मकान बन पाना संभव नहीं। लेकिन जब प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में उनका नाम आया और उन्हें पहली किस्त मिली, तो उनकी जिंदगी बदल गई।
सगे-संबंधियों की मदद से उन्होंने मकान का निर्माण शुरू किया और धीरे-धीरे वह पक्का मकान तैयार हो गया। बरसात का मौसम आने के बावजूद अब उन्हें पानी टपकने या कच्चे मकान के ढह जाने का डर नहीं है।
अधूरा सपना हुआ पूरा
- छेरकीन बाई बताती हैं – गरीबी के कारण पक्का मकान बनाना हमारे वश की बात नहीं थी। मैं तो उम्मीद भी छोड़ चुकी थी। लेकिन PM आवास योजना में मेरा नाम आने के बाद टूटे हुए सपने पूरे हो गए। यह मकान सिर्फ एक घर नहीं है, बल्कि मेरे लिए जीवनभर का सहारा है।
वह बताती हैं कि अभी मकान में प्लास्टर का काम बाकी है, लेकिन मकान तैयार है और वह उसमें सुरक्षित रह रही हैं।
नाती को बनाया सहारा
जीवनभर अकेली रहने वाली छेरकीन बाई ने अपने एक नाती को गोद लिया है, जो अब उनका ख्याल रखता है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले इस पक्के मकान में अब उनका नाती भी उनके साथ रहेगा और बुढ़ापे में वह अकेली नहीं रहेंगी।
बारिश और धूप से मिली राहत
कच्चे मकान में रहने वाले परिवारों की सबसे बड़ी समस्या बारिश और धूप होती है। छेरकीन बाई को भी हर साल यही परेशानी झेलनी पड़ती थी। लेकिन अब पक्का मकान बनने से वह बारिश, धूप और आंधी जैसी मुसीबतों से बच गई हैं।
उनका कहना है कि – यह सिर्फ पक्का मकान नहीं, बल्कि जीवनभर का सहारा है। अब मुझे किसी परेशानी का डर नहीं है। PM आवास योजना ने मेरी जिंदगी बदल दी।
गरीबों के लिए वरदान बनी योजना
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उन गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, जिनके पास रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां ग्रामीण इलाकों में अब भी कच्चे मकान बड़ी संख्या में हैं, यह योजना वरदान साबित हो रही है।
छेरकीन बाई जैसी कई महिलाएं, बुजुर्ग और गरीब परिवार इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को जताया आभार
- छेरकीन बाई ने कहा – प्रधानमंत्री आवास योजना ने मेरी जिंदगी बदल दी। यह सिर्फ पक्का मकान नहीं है, बल्कि बुढ़ापे का सहारा भी है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का धन्यवाद करती हूँ, जिन्होंने हमारे जैसे गरीबों को यह सुविधा दी।
योजना से बढ़ रहा आत्मविश्वास
इस तरह की कहानियां यह साबित करती हैं कि सरकारी योजनाएं जब सही व्यक्ति तक पहुँचती हैं, तो उसका असर सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर भी होता है। छेरकीन बाई जैसी महिलाओं को अब समाज में भी आत्मसम्मान के साथ जीने का अवसर मिला है।
कोरबा जिले में कई परिवारों को मिला लाभ
कोरबा जिले के विभिन्न विकासखंडों में PM आवास योजना के तहत हजारों परिवारों को पक्का मकान मिला है। जिला प्रशासन की सक्रियता और ग्रामीणों के सहयोग से यह योजना तेजी से आगे बढ़ रही है।
नतीजा
छेरकीन बाई की कहानी इस बात का उदाहरण है कि PM आवास योजना (PMAY) सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उम्मीदों का सहारा है। यह योजना गरीब, बेसहारा और अकेले जीवन जी रहे लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
आज छेरकीन बाई अपने पक्के मकान में सुरक्षित हैं, खुश हैं और उन्हें यह भरोसा है कि आने वाले कल में उनका जीवन पहले से कहीं अधिक सहज और सुरक्षित होगा।
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