Know about Natural Ozempic: अगर आप लंबे समय से शुगर और वजन कंट्रोल करना चाहते हैं और इसके लिए दवाओं का सेवन कर रहे हैं, तो आपको बता दें, भविष्य में इन दवाओं की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल जापान के वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की है और दावा किया है कि बिना दवा के वजन को घटाया और शुगर कंट्रोल भी कर सकते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं इस बारे में. यह कैसे संभव है.
वैज्ञानिकों ने की खास स्टडी
वैज्ञानिकों के द्वारा की गई स्टडी से पता चलता है कि एक बार के जीन मोडिफिकेशन (Gene Modification) से शरीर को अपना ‘प्राकृतिक ओजेम्पिक’ बनाने में मदद मिल सकती है. जापान के शोधकर्ताओं ने जीन एडिटिंग (Gene Editing) का उपयोग करके चूहों के लिवर में परिवर्तन किया है. जिससे एक्सेनाटाइड की आंतरिक आपूर्ति उत्पन्न हुई, जो GLP-1 एगोनिस्ट बायेटा का सक्रिय घटक (Active Ingredient) है. ‘Ozempic’ और ‘Wegovy’ की तरह, बायेटा एक इंजेक्शन है जिसका उपयोग ब्लड शुगर कंट्रोल के लेवल को कंट्रोल करके टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे के इलाज के लिए किया जाता है.
कब इस्तेमाल किया जाता है “नेचुरल ओजेम्पिक” शब्द?
जो लोग नहीं जानते हैं, उन्हें बता दें, “नेचुरल ओजेम्पिक” (Natural Ozempic) शब्द का इस्तेमाल उन प्राकृतिक पदार्थों या तरीकों के लिए किया जाता है, जो वजन घटाने या शुगर को कंट्रोल करने के लिए ओजेम्पिक (Ozempic) दवा के समान कार्य करते हैं. वैसे ओजेम्पिक एक ब्रांड का नाम है, जिसमें ‘सेमाग्लुटाइड’ होता है, जो एक GLP-1 एगोनिस्ट है और टाइप 2 मधुमेह और मोटापे के इलाज के लिए इस्तेमाल होता है.
नहीं है इसके साइड इफेक्ट्स
स्टडी में शामिल चूहे केवल एक उपचार के बाद, छह महीने तक अपने आप एक्सेनाटाइड का उत्पादन करने में सक्षम रहे हैं. जिन चूहों का जीन एडिटिंग किया गया, उन्हें मोटा बनाने और प्रीडायबिटीज के लिए हाई कैलोरी वाला आहार दिया गया. फिर उसी आहार पर रहने वाले उन चूहों की तुलना में जो स्वाभाविक रूप से एक्सेनाटाइड का उत्पादन नहीं कर रहे थे, आनुवंशिक रूप से संशोधित चूहों ने कम खाना खाया, कम वजन बढ़ाया और इंसुलिन के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया दी, जिससे उनके ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल किया गया. सबसे खास ये है इसके कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं सामने आए हैं, जो ओजेम्पिक जैसी दवाओं से बिल्कुल अलग है.
क्या इंसानों के लिए भी काम करना यह ट्रीटमेंट?
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस उपचार का मनुष्यों पर भी ऐसा ही प्रभाव होगा या नहीं, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि यह ओजेम्पिक जैसी दवाओं का अच्छा विकल्प हो सकता है. वहीं ओसाका विश्वविद्यालय के अध्ययन लेखकों ने लिखा: ‘यह स्टडी बताती है कि जीनोम एडिटिंग (Genome Editing) का उपयोग जटिल रोगों के लिए स्थायी उपचार बनाने के लिए किया जा सकता है, जिससे बार-बार दवा लेने की आवश्यकता कम हो सकती है.’