गरियाबंद। कलेक्टोरेट बना इंसाफ की आखिरी चौखट एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जब खरीपदरा गांव के मुरहा नागेश अपनी पत्नी और तीन छोटे बच्चों के साथ कलेक्टोरेट के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गया। इनकी 7.50 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर कथित रूप से गांव के ही एक रसूखदार ने कब्जा कर लिया है। कई सालों से कलेक्टर, तहसील, राजस्व विभाग तक दौड़ने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
कलेक्टोरेट बना इंसाफ की आखिरी चौखट, जमीन के लिए भूख हड़ताल
हालांकि 5 जून 2025 को प्रशासन ने इन्हें वापस दिलवा दिया था मगर 15 दिनों के अंदर ही रसूखदार परिवार ने पुनः उसे जमीन पर कब्जा कर लिया और उनके साथ मारपीट कर इन्हें बेदखल कर दिया । थक-हारकर अब पूरा परिवार इंसाफ की उम्मीद में सड़कों पर है। मुरहा नागेश ने चेतावनी दी है अगर हमारी जमीन नहीं मिली, तो जान दे देंगे। प्रशासन अभी चुप है, पर सवाल गरियाबंद की जनता के दिल में गूंज रहा है । क्या गरीब की जमीन लौटेगी, या फिर एक और परिवार मिट्टी में मिल जाएगा?